High Court और District Court Advocate कैसे बने? जानें [पूरी प्रक्रिया]

क्या आप Law में अपना करियर बनाना चाहते हैं, और आप की इच्छा है के में भी ब्लैक कोट पहन कर अदालत में जाऊं जैसा की फिल्मों में होता है|

पर आपको नहीं पता की Advocate कैसे बने या वकील बनने के लिए eligibility क्या है? जोकि एक कैंडिडेट के पास होनी ही चाहिए| आपको अब चिंता करने की जरुरत नहीं है, Career Jano आपके हर-एक question का Answer “Advocate कैसे बने” के इस आर्टिकल में देगा| आप इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद वकील बनने की पूरी प्रक्रिया जान पाएंगे वोभी step-by-step

कानूनी पेशा (Legal profession) दुनिया भर में एक प्रसिद्ध और रोमांचक करियर पेशा है और बढ़ते करियर विकल्प में से एक है।

यदि आप ऐसी व्यक्ति है जो समाज में अपनी पहचान बनाने की इच्छा रखते हैं और समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं, तो इस करियर विकल्प से अच्छा कुछ भी नहीं है। एक वकील के रूप में आपके पास कानूनी तारीके से कानून का अपयोग करने की शक्ति और समझ होती है। इस्लिये समाज में, आपको लोगों का बहुत सम्मान मिलेगा, जो की हर एक आदमी की खवाहिश होती है।

तो पैसे कमाने के साथ, आप समाज में प्रतिष्ठा भी बना सकते हैं। यदि आप अपने जीवन को इस तरह जीना चाहते हैं तो आपको निश्चित रूप से वकील बनने के इस मार्ग पर विचार करना चाहिए।

Advocate क्या होता है? क्या यह Lawyer बनने से अलग है?

बहुत सारे लोग समझते हैं के वकील को ही एडवोकेट बोला जाता है, और दोनों एक दसरे के समान होते हैं। पर अगर Lawyers के हिसाब से देखा जाए तो इनदोनो में फ़र्क है। यह उन लोगों के बीच एक आम गलतफहमी है जो कानून को सही से नहीं जानते|

Lawyer उस हर व्यक्ति को बोल सकते हैं जिसने लॉ की पढाई की हो और उसके पास लॉ की डिग्री हो|

Advocate वह व्यक्ति होता है जो कानून के किसी विशेष क्षेत्र में माहिर होता है जिसे न्यायालय कानूनी प्रणाली और मुकदमेबाज़ी में महारत हासिल होती है|

एक advocate Court Laws, नागरिक (Civil) और आपराधिक (Criminal) मामलों में expert होता है और किसी क्लाइंट की तरफ से कोर्ट में दलीलें पेश करता है और मुकदमेबाजी करता है। एक advocate ज्यादातर आपराधिक मामलों को देखता है इसलिए उसे Criminal Lawyer भी कहा जाता है। वकालत (Advocacy) कानून का एक अंतःविषय और मुख्य क्षेत्र है।

यदि एक लाइन में वकील (Lawyer) और एडवोकेट के बीच का अंतर बताना हो तो आप यह कह सकते हैं की – सभी Advocates Lawyers होते हैं लेकिन सभी Lawyers Advocate नहीं होते

अगर आप डिक्शनरी में Lawyer और Advocate शब्द का हिंदी में अनुवाद देखेंगे तो आपको same ही अनुवाद मिलेगा। इन दो शब्दों का मतलब हिंदी में vakil (वकील) ही होता है।

लोगों में lawyers और advocate को एक समान समझने की एक वजाह ये भी है के। पहले के समय में जितने भी लोग कानून की पढाई करते थे वो सिर्फ कोर्ट में वकालत ही करते थे, क्योंकि उनके पास कोई और दूसरा विकल्प नहीं था।

पर आज की तेजी से बदलती दुनिया में एक law graduate के पास ढेरों career विकल्प मौजूद हैं।

>> जानें Law करने के बाद कौन-कौन से Career विकल्प मौजूद हैं

 

Advocate बनने के लिए आवश्यक शिक्षा 

Lawyer बनने के लिए दो अलग-अलग academics program मौजूद हैं, 3 साल या 5 साल वाला LLB degree program. इन दोनों में से आप किसी भी एक academic program का चयन कर सकते हैं Lawyer बनने के लिए।

>> जानें इन दो LLB programs के बारे में

आज के समय में यूनिवर्सिटीज ने लॉ में बहुत सारे टाइप के कोर्सेज introduce कर दिए हैं। इस्लिये कभी-कभार स्टूडेंट्स के लिए बड़ा ही कन्फ्यूजन creat हो जाता है के किस एलएलबी प्रोग्राम में एडमिशन लें|

यदि आप 12वीं के छात्र हैं और आपको आगे चलकर वकील बनकर कोर्ट में वकालत करनी है तो सबसे बेहतर जो academic program आपके लिए होगा वो है BA LLB. अधिकांश छात्र (90%) advocate बनने के लिए इसी program का चयन करते हैं|

>> यदि आप District & Session Judge, सिविल Judge या Court Magistrate बनने की इच्छा रखते हैं तो आप हमारे इस लेख को जरूर पढ़ें: Judge कैसे बने?

 

एक Advocate के अंदर कौन-कौन सी गुणवत्ता (Skills) होनी चाहिए?

Law का यह पेशा उन career विकल्पों में से एक है जहां पर आपके marks ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं होते हैं। एक सफल Advocate बनने में LLB के semester exams में प्राप्त अंको की तुलाना में आपके कौशल (skills) ज्यादा अधिक महानवपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ये कुछ निम्लिखित कौशल हैं जोकी एक Advocate के पास होने ही चाहिए…

  1. बातचीत करने का तरीका (Communication and interpersonal skill)
  2. कोनसा शब्द कहाँ पर इस्तेमाल करना है आना चाहिए ताकि कमजोर से कमजोर केस को भी स्ट्रांग बनाया जा सके  (writing skill)
  3. किसी भी प्रकार की स्थिति को संभालने के लिए एक वकील को पर्याप्त आत्मविश्वास (Confidence) होना चाहिए
  4. बातचीत और बहस (Debate) करने के लिए हमेशा तैयार रहें। इसका मतलब यह नहीं है कि बिना मतलब के कहीं भी टांग अड़ा दें, अजीबो-गरीब टॉपिक्स पर बहस न करें, अपने शब्द सही से चुने | क्योंकि जो आप संवाद कर रहे हैं दूसरों को भी तो कुछ समझ में आना चाहिए तभी तो आपके बोलने का लोगों पर प्रभाव पड़ेगा|
  5. मोटी-मोटी कानून की किताबों को पढ़ने के लिए आपको निश्चित रूप से एक अच्छी याददाश्त की आवश्यकता होगी (Sharp minded)

ये कोई जरुरी नहीं है के ये सभी कौशल आपके पास होने ही चाहिए LLB करने से पहले। और अगर आप उन छात्रों में से हैं जिन्के पास ये खूबियाँ पहले से ही मौजूद हैं तो well and good आपको इस फील्ड में ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ेगा।

समय के साथ-साथ जैसे-जैसे आपको इस फील्ड में अनुभव होगा, वैसे-वैसे आप इन सभी skills को डेवलप कर सकते हैं। ज्यादातर Lawyers ये सभी गुण या तो अपने कॉलेज के दौरन सीखते हैं, या फिर advocacy (वकालत) करते-करते।

 

क्या Advocate को English आनी जरूरी है?

एक शब्द में इसका जवाब है ‘Yes’ एक वकील को अंग्रेजी आनी ही चाहिए। क्योंकि कोर्ट में होने वाली अधिकतर कार्यप्रणाली English में होती है। भारत में जितने भी कोर्ट हैं उन सभी की आधिकारिक (official) भाषा अंग्रेजी है।

और जैसा की आप जानते हैं हमारे देश में अंग्रेजी का कितना परभाव है। आगर आप अंग्रेजी नहीं जानते इसका मतलब समझा जाता है आपको ज्ञान नहीं है जबकी ये सच नहीं है। तो अगर आप कानून में करियर बनाना चाहते हैं और कोर्ट में एक जाने-माने एडवोकेट बनाना चाहते हैं तो आपको अंग्रेजी का ज्ञान होना ही चाहिए।

इस्का मतलब ये नहीं के आपको एक दम हाई-फाई अंग्रेजी आनी चाहिए तभी आप Law में अपना करियर बना सकते हैं। समय के साथ आप अपनी इंग्लिश को improve कर सकते हैं।

 

BAR Council of India क्या है? और इसका महत्व

ये बड़ा ही आम प्रश्न है जोकि हर उस एक छात्र के दिमाग में आता है जब वह इंटरनेट पर वकील बनने की जानकारी ढूंढ रहा होता है। तो चलिए जानते हैं Bar Council of India क्या है और इस्का क्या महत्व है एक एडवोकेट की लाइफ में।

हर एक छात्र जो आगे चलकर एक वकील बनना चाहता है उसे बार काउंसिल ऑफ इंडिया के बारे में पता होना ही चाहिए।

Bar council of India एक संस्थान है जोकी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया का एक हिसा है, जिस्का काम भारत में कानूनी शिक्षा को नियंत्रित करना है|

Indian advocate Act, 1961 के अनुसार एक व्यक्ति अदालत में मामले की petition (याचिका) और अदालत के अंदर कानून अभ्यास (मुकादमे) तबी कर सकता है जब उसके पास लाइसेंस हो। License ये प्रमाण देता है के यह जो व्यक्ति है उसके पास कानून की अच्छी जानकारी है और वह भारत के किसी भी कोर्ट में (Supreme Court of India के अलावा) कानून अभ्यास करने के लायक है।

वकालत (Advocacy) का लाइसेंस देने का अधिकार सिर्फ Bar Council of India को होता है।

एक lawyer तब तक advocate नहीं बन सकता जब तक कि उसने  बार काउंसिल ऑफ इंडिया में अपना नाम पंजीकृत नहीं किया हो। इसलिए उस हर एक वकील को Bar Council of India का सदस्य बनना अनिवार्य है जो अदालत में मुक़दमे लड़ना चाहता है|

हर किसी राज्य की एक अलग बार काउंसिल होती है, आपको जिस राज्य के कोर्ट के अंदर वकालत करनी है, आपको उस राज्य के Bar Council में अपना नाम रजिस्टर कराना होगा।

 

क्या LLB distance से भी कर सकते हैं?

Distance-learning उसे बोलते हैं जिसमे की आपको कॉलेज जाने की आवश्यकता नहीं होती, यहां तक के आपको परीक्षा देने भी कॉलेज में नहीं जाना पड़ता। सारा कुछ इंटरनेट के जरिये हो जाता है।

बहुत से छात्रों का यह बड़ा ही सामान्य प्रशन होता है खासतौर पर graduation किये हुए छात्रों का की, क्या colleges लॉ करने के लिए distance learning का ऑप्शन देते हैं और क्या मुझे डिस्टेंस लर्निंग से लॉयर बनने की पढ़ाई करनी चाहिए या नहीं।

क्या distance learning से Law कर सकते हैं? इस्का सिंपल सा जवाब है ‘हां’। इंडिया में बहुत सारे कॉलेज ऐसे हैं जोकी लॉ डिस्टेंस से करवाते हैं। तो आप भी distance से LLB करने के लिए इन colleges में एडमिशन ले सकते हैं।

पर LLB डिस्टेंस से करने में एक समस्या है, जोकी बहुत बड़ी है|

भारत की Bar Council डिस्टेंस-लर्निंग से प्राप्त Law की Degree को मान्यता नहीं देती| बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुसार Law एक पेशेवर डिग्री है जो केवल नियमित रूप (regular) से किया जाना चाहिए।

मतलब के आप एक एडवोकेट नहीं बन सकते और किसी भी कोर्ट में वकालत नहीं कर सकते। क्योंकी बार काउंसिल ऑफ इंडिया ऐसे किसी भी उम्मीदवार को अपनी सदस्यता नहीं देता जिसने law की शिक्षा distance learning से प्राप्त की हो।

तो अगर आपने LLB की डिग्री डिस्टेंस लर्निंग से प्राप्त कर ली और वकील बन भी गए तो इस्का रिजल्ट कुछ नहीं मिलेगा क्यों आप Advocate नहीं बन सकते। मतलब अगर आपको वकालत करनी है तो आपको बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम और कानून मानने पड़ेंगे।

यदि आप कोर्टरूम में कानून का अभ्यास ही नहीं कर सकते हैं तो ऐसा वकील बनने क्या मतलब रह जाता है। इसलिए law करने के लिए distance learning की तरफ न जाएँ| बल्कि किसी regular कॉलेज में admission लें|

 

Advocate कैसे बने? – वकील बनने की Step-by-Step प्रक्रिया

[Step 1] प्रवेश परीक्षा 

इंडिया के बेहतरिन लॉ कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए आपको entrance exam देना पड़ेगा, जिसके लिए आपका 12वीं कक्षा पास होना जरुरी है। CLAT (Common Law Admission Test) भारत में सबसे लोकप्रिय प्रवेश परीक्षा, और इस परीक्षा को हर वो छात्र देता है जिसे वकील बनना होता है।

India में हर साल सैकड़ों law colleges अपने यहाँ CLAT के द्वारा admission देते हैं|

हालाँकि बहोत सारे प्राइवेट लॉ कॉलेज बिना किसी CLAT के स्कोर और बिना किसी प्रवेश परीक्षा के अपने यहाँ एडमिशन दे देते हैं। तो आप इन प्राइवेट कॉलेजों में भी admission ले सकते हैं पर इस विकल्प को आप दूसरे नंबर पर रखें| पहले आपको CLAT की तयारी करनी चाहिए।

>> जानें CLAT के अलावा और दूसरे लोकप्रिय प्रवेश परीक्षाओं के बारे में

[Step 2] LLB (Bachelor of Laws)/ Integrated LLB

वकील बनने के लिए आपको कानून (law) की पढ़ाई करनी पड़ेगी, जिसके लिए आपको LLB में ग्रेजुएशन करनी होगी। वकील बनने के लिए आप LLB के किसी भी एक academic program, LLB (3 वर्ष) या Integrated LLB (यह 5 वर्ष की होती है) को चुन सकते हैं|

>> भारत के पॉपुलर और सबसे सम्मानित law colleges के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें

[Step 3] Internship/ Legal trainee

आप अपने कॉलेज के दौरान, कानून की पढ़ाई करते समय, ट्रेनिंग के लिए apply कर सकते हैं। Internship के लिए आप किसी senior advocate के पास ट्रेनिंग कर सकते हैं।

वैसे तो बहुत सारे प्राइवेट law firms और पब्लिक लॉ संस्थान कॉलेज के छात्रों को इंटर्नशिप के लिए अनुमति देते हैं, तो यहां भी आप ट्रेनिंग के लिए आवेदन कर सकते हैं।

ज्यादातर छात्र इंटर्नशिप के लिए लॉ के फाइनल ईयर में जाते हैं। ट्रेनिंग से आपको काफी फायदा मिलेगा, क्योंकि ट्रेनिंग के दौरान आप वो सब चीजें प्रैक्टिकल सिखेंगे| जो आपने अबतक सिरफ अपने कॉलेज में सुनी और कानून की किताबों में पढ़ी होती हैं।

[Step 4] Bar Council of India

लॉ की डिग्री पूरी करने के बाद आपको बार काउंसिल ऑफ इंडिया में अपना नाम रजिस्टर करना होगा। हर एक राज्य में एक बार काउंसिल होती है आप किसी भी राज्य के Bar में अपना नाम रजिस्टर करा सकते हैं, के में एक वकील बनना या वकालत करना चाहता हूं कृपा मेरे आवेदन को स्वीकार करें।

Bar Council of Delhi में नाम पंजीकरण की प्रक्रिया को जाने

[Step 5] Junior Assistant

अपना नाम Bar Council of India में नामांकन करने के बाद आप किसी High court या किसी subordinate court (जिला स्तर की अदालतों) में किसी advocate के assistant बन सकते हैं। यहाँ से आपको जो experience मिलेगा उससे आपको अगले स्टेप (step 6) को क्लियर करने में मदद मिलेगी।

किसी senior advocate के साथ काम करने से आपको कोर्ट के बारे में हर एक चिज मालुम चल जाएगी, जैसे के याचिका कैसे दायर की जाति है, कोर्ट के अंदर के नियम और कानून और उनको सही तरीके से कैसे फॉलो करना है।

[Step 6] All India Bar Examination (AIBE)

Bar Council में पंजीकरण पूरा करने के बाद आपको AIBE की परीक्षा देनी होती है जोकी फैसला करेगा कि आप कोर्ट में वकालत करने के काबिल हैं या नहीं।

AIBE की परीक्षा पास करने के बाद आपको एक सर्टिफिकेट जारी किया जायेगा, जिसमे आपके advocate होने का प्रमाण रहता है।

[Step 7] Advocate

Congratulations! अब आप वकील बन चुके हैं जोकि कोर्ट में वकालत कर सकता है| और अब आप किसी भी व्यक्ति (client) के लिए कोर्ट में अपील कर पाएंगे और मुकदमा लड़ सकते हैं।

AIBE परीक्षा पास करने के बाद आप भारत के किसी भी राज्य के High court और Subordinate court (जिला अदालत) में वकालत कर सकते हैं। Supreme Court of India में वकालत करने के लिए अलग प्रक्रिया है। जानने के लिए आप हमारे इस लेख को पढ़ सकते हैं: Supreme Court में Lawyer कैसे बने?

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एक वकील के कार्य? (Job Description)

Training period के दौरान (Assistant lawyer)

  • एक सहायक वकील के रूप में, आपको बहुत सारे कानूनी शोध (Legal Research) करने पड़ते हैं  और अपने सहयोग्यिओं की मदद करनी पड़ती है किसी केस का विश्लेषण करने में ताकि आपके क्लाइंट का केस मजबुत बन सके|
  • अपने वरिष्ठ वकील के साथ अदालत में जाना होता है ताकि किसी चीज़ की जरुरत पड़ने पर आप उनका सहयोग कर सकें| साथ में आपको केस के महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान रखना होता है और उनको लिखना होता है|
  • Case Drafting: Judiciary system में पेपर (केस के पेपर) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, आप केस के पेपर लिखने और तैयार करने के लिए ज़िम्मेदार होंगे, जो आगे की केस प्रक्रिया के लिए अदालत में प्रस्तुत किये जाते हैं।
  • अदालत में तैयार केस फ़ाइल दर्ज करना और अगली केस सुनवाई के लिए Court Judge से तिथि लेना|

मुकदमेबाजी (Litigation) के लिए लाइसेंस प्राप्त करने के बाद [Advocate]

  1. वकील कानूनी शोध (research) करके अपना केस मजबूत बनाता है। एक वकील के लिए शोध करना बहोत जरुरी होता है क्योंकि वकील के लिए ये सबसे अच्छा साधन है केस जितने के लिए।
  2. क्लाइंट से प्राप्त सबूत का विश्लेषण करना और कहीं दिक्कत लगे तो उसको सुधारना|
  3. एक वकील को अदालत में केस लड़ने की तुलना में अपना अधिकांश समय लेखन पर खर्च करना पड़ता है।
  4. PIL (Public Interest Litigation) तैयार करना और कोर्ट में निवेदन करना
  5. अदालत में अपने क्लाइंट्स की तरफ से कार्रवाई (prosecution) करना|

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भारत में वकालत का Career Scope

जैसा के हमें पता है न केवल भारत में बलके बहार के देशो में अपराध दर कितनी बढ़ रही है। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब आप अखबार या TV news channel पर कोई अपराध की खबर न सुनो। यहां तक की आधे से ज्यादा न्यूज क्राइम की ही होती है। इस्का मतलब के हर दिन हज़ारों लोग किसी-ना-किसी अपराध का शिकार होते हैं।

और जाहिर सी बात है, अगर कोई व्यक्ति जो बेक़सूर या आपराधिक मामले में पीड़ित है वो न्याय के लिए कोर्ट में जायेगा ही, और अपने केस को न्यायालय में दाखिल करने के लिए किसी Advocate को पकड़े गा|

तो यदि आप सोच रहे हैं लॉ मैं अपना करियर बनाने केलिए और advocate बन्ने केलिए, तो निश्चित रूप से आप इस करियर को चुन सकते हैं| Advocate दुनिया भर में काफी अच्छा पेशा माना जाता है|

इसके अलावा अगर आप सोचते हैं कि काश में भी लोगों की हेल्प करपाता, और मुझे करना चाहिए तो लॉ आप केलिए एक दम परफेक्ट करियर ऑप्शन है|

इस profession में पैसा तो है ही और साथ में जो इज्जत समाज में मिलती है वो अलग|

 

Advocate की Salary कितनी होती है?

Advocate दो तरह के होते हैं: एक वो जो अकेले काम करते हैं या किसी law firm के साथ (मतलब Private Advocate) और दूसरे वो जो सरकार के लिए काम करते हैं, जिन्को सरकारी वकील बोलते हैं (Public Advocate)

एक सरकारी वकील (Public Prosecutor) का मासिक वेतन 15, 000 से लेकर 39,500 ₹ तक होता है, साथ ही अन्य सरकारी सुविधाएं, perks और allowance भी उपलब्ध होते हैं|

>> जानें सरकारी वकील कैसे बने?

एक प्राइवेट वकील (जो अकेले काम करता है) की सैलरी निर्भर करती है उसके पास कितने क्लाइंट हैं या वह महीने में कितने क्लाइंट्स से डील करता है और मार्केट में उसकी क्या इमेज है। मतलब के आप महिने के 20,000 से लेकर 70,000 रुपये तक भी कमा सकते हैं या चाहें तो लाखो में भी काम सकता है, वेतन आपके market value पर निर्भर करता है|

और अगर आप किसी senior advocate के अंतर्गत या किसी प्राइवेट लॉ फर्म के लिए काम कर रहे हैं तो आप की शरुआती सैलरी 10,000 से 25,000 ₹ के बिच में हो सकती है| कोई जरुरी नहीं कि आपकी सैलरी इसी रेंज के बिच में हो ये तो आप पर और आप के लक पर निर्भर करता है, आप इस सैलरी रेंज से जायदा भी कमा सकते हैं|

आपको पैसे के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि एक अच्छे वकील के लिए आकाश ही एकमात्र सीमा है। एक अच्छा वकील वही बन सकता है जिसकी पहली प्राथमिकता अपराध के खिलाफ लड़ने की हो, जब आप के पास केसेस हैंडल करने का तजुर्बा हो जायेगा तो आप अपने clients से एक हियरिंग (केसेस को सुनना) के लिए लाखों में चार्ज कर सकते हो|

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4 Comments

  1. Kya mai 31 yrs ki age me llb shuru kar sakta hu kya mujhe is umar me advocacy me career dekhna chahiye

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